प्रधानमंत्री ने परोपकारी कार्यों और दूसरों के कल्याण के महत्व को रेखांकित करने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया

प्रधानमंत्री ने परोपकारी कार्यों और दूसरों के कल्याण के महत्व को रेखांकित करने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात का उल्‍लेख किया कि मानव जीवन का सच्चा भाव अन्य प्राणियों के कल्याण और भलाई के लिए निरंतर कार्य करने में निहित है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु।
प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥”

सुभाषितम का तात्‍पर्य है कि इस दुनिया में मानव जीवन की मूल भावना अपनी शारीरिक क्षमताओं, धन, बुद्धि और वाणी के माध्यम से अन्य प्राणियों के प्रति निरंतर परोपकारी और कल्याण-उन्मुख कार्य करने में निहित है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु।
प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥”

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