प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने तथा देश में सहकारिता आधारित सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी विकास को गति देने की दिशा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की महापरिषद की 93वीं बैठक आज नई दिल्ली स्थित निगम के मुख्यालय में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में NCDC की वित्तीय एवं संस्थागत उपलब्धियों, सहकारी क्षेत्र में वित्तपोषण के विस्तार, नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के विकास, ग्रामीण आजीविका के सुदृढ़ीकरण तथा निगम की भावी कार्ययोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
महापरिषद की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले लगभग पाँच वर्षों में NCDC ने अत्यंत संतोषजनक कार्य किया है। निगम ने न केवल वित्तीय प्रदर्शन और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में उल्लेखनीय प्रगति की है, बल्कि प्रति कर्मचारी लाभ में वृद्धि, ऋण स्वीकृतियों एवं संवितरण में विस्तार और नेट NPA को शून्य बनाए रखने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि NCDC ने अब देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अपनी उपस्थिति स्थापित की है। लद्दाख जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तथा पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों में कार्यालयों का विस्तार सहकारी आंदोलन को देश के अंतिम छोर तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। श्री अमित शाह ने इन उपलब्धियों के लिए निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारिता क्षेत्र की दशकों पुरानी माँग को पूरा करते हुए एक अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। इसका उद्देश्य केवल सहकारी संस्थाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश के विकास का आकलन केवल सकल घरेलू उत्पाद, प्रति व्यक्ति आय अथवा औद्योगिक निवेश के आधार पर नहीं किया जा सकता। वास्तविक विकास का अर्थ यह भी है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को अवसर मिले, प्रत्येक नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जी सके और देश के विकास में अपना योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि सर्वस्पर्शी विकास वह है जो प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे, जबकि सर्वसमावेशी विकास का अर्थ है कि लद्दाख से लक्षद्वीप तक सभी क्षेत्रों की विकास यात्रा में समान भागीदारी सुनिश्चित हो।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सीमित पूँजी वाले छोटे किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण महिलाओं, मछुआरों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सामूहिक शक्ति को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम सहकारिता है। सहकारी संस्थाएँ कम पूँजी के साथ बड़ी संख्या में लोगों को संगठित कर उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और आयवृद्धि के नए अवसर उपलब्ध करा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अमूल, इफको, लिज्जत पापड़ और देश की अनेक सफल सहकारी संस्थाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सहकारिता के मूल्यों के साथ पेशेवर प्रबंधन अपनाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी संस्थाएँ विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहकारी रैंकिंग में भारतीय सहकारी संस्थाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरे देश के सहकारी क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।
श्री अमित शाह ने कहा कि NCDC ने उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, ग्रामीण औद्योगिक गतिविधियों, जल संरक्षण, कृषि बीमा, सहकारी बैंकिंग तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में अपने कार्यकलापों का विस्तार किया है। निगम ने राष्ट्रीय स्तर की बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के गठन, पूँजी निवेश और संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि NCDC की पिछले पाँच वर्षों की उपलब्धियों को देखते हुए इस अवधि को निगम के लिए एक प्रकार से स्वर्णिम काल कहा जा सकता है, लेकिन इन उपलब्धियों से संतुष्ट होकर रुकना नहीं है। बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप निगम की संस्थागत संरचना, वित्तीय संसाधन जुटाने की क्षमता, पेशेवर कार्यप्रणाली तथा सहकारी संस्थाओं के साथ भागीदारी के स्वरूप में व्यापक सुधार करने होंगे।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने NCDC के अगले 25 वर्षों के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सहकारी क्षेत्र के अनुभवी प्रतिनिधियों और पेशेवर विशेषज्ञों का एक समूह गठित किया जाना चाहिए, जो निगम की वर्तमान संरचना, पूँजी जुटाने के वैकल्पिक माध्यमों, सहकारी संस्थाओं की भागीदारी, वित्तीय स्वायत्तता, संगठनात्मक सुधार और भविष्य के व्यावसायिक अवसरों पर विचार करे। उन्होंने इन विषयों पर एक कार्यशाला आयोजित करने का सुझाव दिया। श्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2027 के बाद इस विषय पर एक विशेष बैठक आयोजित कर विस्तृत प्रस्तुतीकरण और चर्चा की जाए, ताकि दिसंबर 2027 तक आवश्यक निर्णयों की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
श्री अमित शाह ने कहा कि सहकारी संस्थाओं की प्रशासनिक व्यवस्था पेशेवर होनी चाहिए, जबकि उनका मूल दृष्टिकोण सहकारिता के सिद्धांतों पर आधारित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता और सरकारी बैंकों पर अत्यधिक निर्भरता से संस्थागत विकास की कुछ सीमाएँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए NCDC को ऐसे वित्तीय और संगठनात्मक मॉडल विकसित करने चाहिए, जिनसे निगम अपनी बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप संसाधन जुटा सके और सहकारी क्षेत्र की संभावनाओं का पूर्ण उपयोग कर सके। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र का विकास NCDC की जिम्मेदारी है और NCDC के विकास को सुनिश्चित करना महापरिषद के सभी सदस्यों का सामूहिक संकल्प होना चाहिए।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL), भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL), भारत टैक्सी, सहकार सारथी तथा शहरी सहकारी बैंकों के अम्ब्रेला संगठन NUCFDC जैसी संस्थाओं के विकास में NCDC की भूमिका की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ये संस्थाएँ राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी और प्रभावशाली बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के रूप में उभर सकती हैं। उन्होंने कहा कि बड़े सहकारी उपक्रमों को वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ छोटे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों की आजीविका में प्रत्यक्ष सुधार लाना भी NCDC की समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मत्स्य क्षेत्र का उदाहरण देते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए लगभग 100 ट्रॉलरों को NCDC के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने इस पहल के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे वित्तपोषण से बड़ी संख्या में मछुआरा परिवारों की मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। उन्होंने कहा कि किसी बड़ी वित्तीय संस्था के लिए ऐसी परियोजना का आकार सीमित प्रतीत हो सकता है, लेकिन इससे जुड़े परिवारों के जीवन, बच्चों की शिक्षा और भविष्य के अवसरों में आने वाला परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निगम को ऐसी जमीनी स्तर की पहलों को और अधिक विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री अमित शाह ने सहकारी चीनी मिलों के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था पर आधारित नए व्यावसायिक मॉडल विकसित करने पर भी बल दिया। उन्होंने महाराष्ट्र के कोल्हापुर और पुणे में प्रस्तावित नई बहुराज्यीय सहकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि चीनी मिलों से जुड़े मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए साझा प्रसंस्करण एवं औद्योगिक सुविधाएँ विकसित की जा सकती हैं। इससे विशेष रूप से उन सहकारी चीनी मिलों को लाभ होगा जो अपने स्तर पर बड़े निवेश अथवा आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की स्थिति में नहीं हैं। इस व्यवस्था से अर्जित लाभ संबंधित सहकारी चीनी मिलों तक पहुँचाने पर जोर दिया गया।
युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर बल देते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि ‘सहकार मित्र’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप पूरी करने वाले योग्य युवाओं को नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे सहकारी संस्थाओं में आधुनिक प्रबंधन, व्यावसायिक दक्षता और पेशेवर नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बनास डेयरी के सफल प्रबंधन मॉडल के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उसके अनुभवों का उपयोग NCDC की भावी कार्यप्रणाली