अब ईंटों के नहीं, आरसीसीस के होंगे 466 वाटर वक्र्स,1000 करोड़ होंगे खर्च

अब ईंटों के नहीं, आरसीसीस के होंगे 466 वाटर वक्र्स,1000 करोड़ होंगे खर्च

चंडीगढ़। नायब सरकार ने प्रदेश में लोगों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जलघरों के कायाकल्प की योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पुराने और ईंटों से बने उन सभी वाटर वक्र्स को आरसीसी आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं, जहां भूजल के मिश्रण से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रदेश में ऐसे 466 वाटर वक्र्स को करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से आरसीसी आधारित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि जहां संभव हो, ट्यूबवेल आधारित जलघरों को प्राथमिकता से नहरी पानी आधारित बनाया जाए।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह निर्देश मंगलवार को जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में जलघरों व पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। बैठक में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा भी मौजूद थे।
विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 1888 नहरी पानी आधारित वाटर वर्क्स तथा 4199 बूस्टिंग स्टेशन संचालित हैं। इनके अलावा 12404 ट्यूबवेल तथा 5 रेनी वैल स्कीम्स भी जलापूर्ति के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 3674 ट्यूबवेल संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंपे जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में जरूरत के अनुसार 103 नए नहरी आधारित वाटर वर्क्स, 1065 नए ट्यूबवेल, 369 नए बूस्टिंग स्टेशन तथा 2 नए रेनी वैल लगाने की प्रक्रिया प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि 7005 किलोमीटर वितरण नेटवर्क में से 1525 किलोमीटर लंबी लाइनों को बदला जाएगा जिसमें से मार्च 2027 तक 837 किलोमीटर वितरण नेटवर्क को बदल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ईंटों से निर्मित 466 वाटर वर्क्स को आरसीसी आधारित वाटर वर्क्स में बदला जा रहा है। इस कार्य पर लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, मुख्यमंत्री के उप-प्रधान सचिव यशपाल यादव तथा इंजीनियर-इन-चीफ देवेंद्र दहिया सहित विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाना हरियाणा सरकार की प्राथमिकता है। शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए पैसों की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी वाटर वक्र्स को आरसीसी आधारित बनाया जाए जहां भूमिगत पानी, वाटर वक्र्स के पानी से मिक्स होने से पानी की टीडीएस, हार्डनेस तथा फ्लोराइड की मात्रा अधिक हो रही है। ऐसे पानी को पूरी तरह से पीने योग्य बनाने पर वाटर वक्र्स की मशीनरी पर दबाव बढ़ता है। इसलिए ऐसे सभी वाटर वक्र्स को आरसीसी आधारित बनवाया जाए।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार द्वारा वर्तमान में किए जा रहे प्रयासों से आगामी वर्षों में भूमिगत जलस्तर में सुधार नजर आएगा। इससे न केवल गिरते भूजल स्तर पर रोक लगेगी बल्कि पानी की गुणवत्ता भी सुधरेगी। उन्होंने बताया कि ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थापना के कारण यमुना का जो पानी हरियाणा से दिल्ली जा रहा है उसकी गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो नए वाटर वक्र्स बनाए जा रहे हैं उनकी क्षमता बढ़ती आबादी के अनुरूप बढ़ाई जाए।

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