राखीगढ़ी ऐतिहासिक स्थल हजारों वर्ष पुरानी पहचान, आत्मीयता और स्वाभिमान का प्रतीक — मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

राखीगढ़ी ऐतिहासिक स्थल हजारों वर्ष पुरानी पहचान, आत्मीयता और स्वाभिमान का प्रतीक — मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

नारनौंद/हांसी, 19 अक्तूबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राखीगढ़ी की मिट्टी में हमारे पुरखों के श्रम, हुनर और एक विकसित सभ्यता की स्मृतियां सुरक्षित हैं। यह ऐतिहासिक स्थल हमारी हजारों वर्ष पुरानी पहचान, आत्मीयता और स्वाभिमान का प्रतीक है। सरकार राखीगढ़ी के संरक्षण, अनुसंधान, पर्यटन और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री सोमवार को हांसी जिला के राखीगढ़ी में 7 दिवसीय ‘राखीगढ़ी महोत्सव-2026’ के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष महोत्सव की थीम ‘माटी से महोत्सव तक’ रखी गई है। इस अवसर पर विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम के दौरान राखीगढ़ी की ग्राम पंचायत की तरफ से दिए गए मांग पत्र को पूरा करने का आश्वासन भी दिया, साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत को 51 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा भी की।

इससे पहले मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने राखीगढ़ी में बन रहे संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने महोत्सव में लगाई गई विभिन्न स्टॉल पर खरीदारी भी की तथा खेल गतिविधियों और साइट पर आयोजित अन्य गतिविधियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पुरातत्व विभाग द्वारा लगाए गए खुदाई के डेमो का भी अवलोकन किया, जिसमें खुदाई की प्रक्रिया को समझाने के साथ उस दौरान मिले अवशेषों को प्रदर्शित किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा तथा हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने सील का भी अवलोकन किया।

श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि राखीगढ़ी का यह महोत्सव हमें अपनी जड़ों को जानने और आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपना दायित्व समझने का अवसर देगा। ‘माटी से महोत्सव तक’ की थीम में हमारी सभ्यता की यात्रा समाई हुई है। यही माटी किसान के हाथों में अन्न बनती है, कुम्हार के हाथों में आकार लेती है और कलाकार के हाथों में संस्कृति की अभिव्यक्ति बन जाती है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र ने मानवता को कर्म का संदेश दिया, जबकि राखीगढ़ी ने हजारों वर्ष पहले की सभ्य मानव संस्कृति को उजागर किया है। यहां मानव जीवन, शिल्प, कृषि और सामुदायिक व्यवस्था के विकास की महत्वपूर्ण कहानी धरती की परतों में सुरक्षित है। यहां मिले मिट्टी के बर्तन, मनके, मुहरें और शिल्प से जुड़ी वस्तुएं हमारे पूर्वजों की सृजनशीलता का परिचय देती हैं।

नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास की सार्थकता उससे मिलने वाली सीख में भी है। राखीगढ़ी की सुनियोजित बस्ती हमें यह सोचने का अवसर देती है कि हम अपने गांवों और शहरों को अधिक स्वच्छ, संवेदनशील और प्रकृति के अनुकूल कैसे बनाएं। उन्होंने युवाओं से अपनी विरासत को जानने और उसकी सही जानकारी आगे पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषाएं सीखें, संवाद का कौशल बढ़ाएं और डिजिटल माध्यमों पर राखीगढ़ी की प्रामाणिक कहानी पहुंचाएं। विद्यालयों में राखीगढ़ी विषय पर प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां भी इस दिशा में उपयोगी पहल हैं।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों को स्थानीय विरासत से परिचित कराने तथा ऐतिहासिक स्थलों और संग्रहालयों तक लेकर जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को अपने आसपास के इतिहास की जानकारी होगी, वह दुनिया में कहीं भी जाकर अपनी धरती की कहानी गर्व और प्रमाणिकता के साथ बता सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राखीगढ़ी पर होगा विचार-विमर्श

मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के विद्वान राखीगढ़ी से प्राप्त साक्ष्यों, नवीन खोजों और भविष्य के शोध की संभावनाओं पर विचार करेंगे। इससे नई शोध योजनाओं, संस्थागत सहयोग और ज्ञान के व्यापक प्रसार का आधार तैयार होगा। उन्होंने विद्वानों और पुरातत्वविदों के परिश्रम को नमन करते हुए कहा कि वे धरती की परतों को पढ़कर बिखरे हुए साक्ष्यों को जोड़ते हैं और मानव सभ्यता के अनकहे अध्याय सामने लाते हैं।

राखीगढ़ी के विकास पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकास भी, विरासत भी’ का विजन हमारे सामने रखा है। आधुनिक भारत का निर्माण अपनी सांस्कृतिक जड़ों से शक्ति लेकर हो, यही उनकी सोच है। केंद्र सरकार द्वारा जिन पांच पुरातात्विक स्थलों को ‘आइकॉनिक साइट’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी, उनमें राखीगढ़ी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी को पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान देने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। राखीगढ़ी को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है। यहां के अवशेषों पर गहन शोध के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां संग्रहालय एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर के निर्माण का सिविल कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अगले चरण में लगभग 188 करोड़ रुपये की लागत से इसे विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है।

सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना

उन्होंने कहा कि सरकार ने सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना भी की है। इसके माध्यम से महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों के बीच पर्यटन की दृष्टि से बेहतर संपर्क और समन्वय विकसित करने का प्रयास होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राखीगढ़ी के अलावा प्रदेश के अन्य पुरातात्विक महत्व के स्थलों के विकास के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। पुरानी तहसील बिल्डिंग नूंह, लोहारू के किले और तावडू के मकबरा परिसर को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। पंचकूला के सेक्टर-5 में स्टेट ऑफ आर्ट पुरातात्विक संग्रहालय स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन संस्कृति के संरक्षण और उसकी पहचान के लिए सभी राज्य संरक्षित स्मारकों की योजना और बाहरी डिजाइन की रूपरेखा तैयार करने की परियोजना शुरू की गई है। हरियाणा की कला एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षा, संरक्षण, बढ़ावा और प्रोत्साहन देने के लिए राज्य कला एवं संस्कृति नीति ‘कलश’ बनाई गई है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की धरोहरों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से अवगत कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। इसी दिशा में कुरुक्षेत्र की धरा पर अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार अपनी विरासत और धरोहर को सहेजकर उसके आधार पर आधुनिक हरियाणा के निर्माण में लगी है। राखीगढ़ी महोत्सव भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाता है और ऐतिहासिक धरोहर को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।  मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि वे इस महोत्सव से अपनी माटी को जानने, अपनी विरासत को सहेजने और उससे मिली प्रेरणा से बेहतर भविष्य बनाने का संकल्प लेकर जाएं।

राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए मिलकर करेंगे प्रयास : डॉ. अरविंद शर्मा

हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और यहां विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मिलकर प्रयास किए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर विकास एवं रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी के पुरातात्विक अवशेष हमारी प्राचीन सभ्यता और पूर्वजों के रहन-सहन की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। यहां मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि प्राचीन समय में लोग जल निकासी, स्वच्छ पेयजल, खेती-बाड़ी और बैलगाड़ी जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग करते थे। मिट्टी से बनी वस्तुएं उस समय के कारीगरों के हुनर और सृजनशीलता को भी दर्शाती हैं।

डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राखीगढ़ी महोत्सव के माध्यम से लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। महोत्सव के दौरान युवाओं के सीखने के लिए छोटे-छोटे कोर्स और प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी राखीगढ़ी का उल्लेख किया है और इसे आइकॉनिक साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राखीगढ़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास आगे बढ़ रहे हैं।

राखीगढ़ी महोत्सव युवाओं को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ने का माध्यम : डॉ. अमित अग्रवाल

विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का राखीगढ़ी पहुंचने पर स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में शुरू किया गया राखीगढ़ी महोत्सव आज अपने तीसरे आयोजन तक पहुंच गया है। महोत्सव के माध्यम से आसपास के स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी प्राचीन संस्कृति और विरासत को पहचाने और उससे जुड़ी रहे। उन्होंने मंच पर मौजूद विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा का भी अभिनंदन करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विभाग आगे बढ़ रहा है। अगले सात दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के माध्यम से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा।

डॉ अमित अग्रवाल ने कहा कि राखीगढ़ी को देश के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में नई पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यहां ओपन म्यूजियम और साइट म्यूजियम विकसित करने की योजना है। साइट म्यूजियम का ढांचा तैयार हो चुका है और इसे अगले महोत्सव से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी का प्रचार-प्रसार बढ़ने से देश-विदेश से पर्यटक यहां आएंगे। इससे हड़प्पा-सिंधु सभ्यता की समृद्ध विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राखीगढ़ी महोत्सव हांसी जिले की आन-बान-शान है।
मुख्यमंत्री के आगमन से राखीगढ़ी की धरोहर और क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई गति: विधायक विनोद भयाना

हांसी के विधायक  विनोद भयाना ने बतौर मेजबान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का राखीगढ़ी महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचना हांसी और हिसार क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह राखीगढ़ी का तीसरा महोत्सव है और हिसार जिले के लिहाज से यह दूसरा अवसर है, जब मुख्यमंत्री स्वयं इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल हुए हैं।

विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री के आगमन से हजारों वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के प्रयासों को मजबूती मिली है। राखीगढ़ी की ऐतिहासिक महत्ता को व्यापक स्तर पर सामने लाने के साथ-साथ इसके आसपास के क्षेत्र के विकास को भी नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि महोत्सव के माध्यम से देश-विदेश के लोगों को प्राचीन सभ्यता, हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्र की गौरवशाली ऐतिहासिक पहचान से परिचित होने का अवसर मिलेगा। अंत में विधायक विनोद भयाना ने सभी क्षेत्रवासियों को विजयदशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।

राखीगढ़ी मानव सभ्यता और इतिहास के अध्ययन का प्रामाणिक केंद्र बनेगा: कैप्टन अभिमन्यु

पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने अपने संबोधन में कहा कि राखीगढ़ी केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास और प्राचीन जीवनशैली को समझने का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी की ऐतिहासिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने और इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए दीर्घकालिक प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पर्यटकों और शोधकर्ताओं को प्राचीन सभ्यता के अवशेषों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि सरस्वती-सिंधु सभ्यता और वैदिक परंपरा से जुड़े पुरातात्विक साक्ष्यों के अध्ययन के माध्यम से भारतीय इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में राखीगढ़ी महोत्सव राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा और प्रसिद्ध सूरजकुंड तथा खजुराहो महोत्सवों की तरह एक प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन के रूप में विकसित होगा। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी की विरासत का संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन आने वाली पीढ़ियों को भारत के प्राचीन इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस मौके पर विधायक सावित्री जिंदल, विधायक रामकुमार गौतम, विधायक रणधीर पनिहार, आईजी कुलदीप सिंह ,पूर्व राज्यसभा सांसद जनरल डीपी वत्स, निदेशक अमित खत्री, उपायुक्त राहुल नरवाल, पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, एडीसी लक्षित सरीन, चेयरमैन रवि सैनी, माटी कला बोर्ड हरियाणा के अध्यक्ष अनूप प्रजापति, जिला परिषद अध्यक्ष सोनू सिहाग, भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक सैनी, जिला अध्यक्ष हिसार आशा खेदड़, मेयर हिसार प्रवीण पोपली,  मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर अशोक छाबड़ा, एसडीएम विकास यादव,जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुभाष चंद्र, सीटीएम हिमांशु चौहान,डीआरओ राजकुमार, डीडीपीओ संदीप भारद्वाज, डीएसपी विनोद शंकर भारद्वाज, डीएसपी रविंद्र सांगवान, डीएसपी देवेंद्र नैन, डीएफएससी अनुराधा, सिविल सर्जन डॉ राहुल बुद्धिराजा तथा गांव की सरपंच मीनाक्षी सहित,अशोक कनोजिया, धर्मबीर रतेरिया, विजेंद्र लोहान, सुखविंद्र जाखड़ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा पार्टी पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राखीगढ़ी महोत्सव में हड़प्पाकालीन धरोहर का किया अवलोकन, कृत्रिम उत्खनन कर जाना पुरातात्विक महत्व

ई-कार्ट में सवार होकर मेला स्थल पहुंचे मुख्यमंत्री, विभिन्न विभागों और उद्यमियों की प्रदर्शनी का किया निरीक्षण, खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह

नारनौंद, 19 अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव के दौरान हड़प्पाकालीन वस्तुओं पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी में सरस्वती-सिंधु सभ्यता से संबंधित पुरातात्विक साक्ष्यों, प्राचीन नगर नियोजन, जल प्रबंधन, कृषि व्यवस्था, लेखन कला, धार्मिक परंपराओं और तत्कालीन जीवनशैली से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं का अवलोकन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री संग्रहालय से ई-कार्ट में सवार होकर महोत्सव स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने कृत्रिम उत्खनन गतिविधि में भाग लिया और विभिन्न विभागों तथा उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने खेल प्रतियोगिताओं का शुभारंभ कर खिलाड़ियों से भी संवाद किया और उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत राखीगढ़ी की ओर से मुख्यमंत्री का पारंपरिक पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया तथा उन्हें हस्तनिर्मित बैलगाड़ी स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई।

प्राचीन नगर नियोजन और उन्नत जीवनशैली के साक्ष्यों को करीब से देखा

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित सरस्वती-सिंधु सभ्यता से जुड़े विभिन्न पुरातात्विक साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया। प्रदर्शनी में प्राचीन नगर योजना, गलियों की व्यवस्था, जल प्रबंधन प्रणाली, कृषि व्यवस्था, स्नानागार और जल संरचनाओं से जुड़े प्रमाणों को प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही वन नियोजन, प्राचीन गोदी अथवा नौका संबंधी संरचनाओं के साक्ष्य, लेखन कला, लिपि, वजन मापने के उपकरण, मापन के पैमाने और सिलबट्टे जैसी वस्तुओं के माध्यम से उस समय के सामाजिक और आर्थिक जीवन की जानकारी प्रस्तुत की गई।

प्रदर्शनी में शिवलिंग, स्वास्तिक, पीपल से संबंधित साक्ष्य, योग परंपरा, पहिए और बैलगाड़ी से जुड़े प्रमाण भी प्रदर्शित किए गए। इसके अतिरिक्त तांबे का दर्पण, मिट्टी के बर्तन, लेखन सामग्री, पूजा स्थलों के अवशेष, हर्बल सफाई उत्पादों से संबंधित जानकारी तथा डीएनए अवशेषों के वैज्ञानिक विश्लेषण से जुड़े विषयों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया। इन वस्तुओं और साक्ष्यों के माध्यम से प्राचीन सभ्यता की तकनीकी दक्षता, शिल्पकला, धार्मिक मान्यताओं, व्यापारिक गतिविधियों और दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया।

ई-कार्ट में सवार होकर पहुंचे मेला स्थल, कृत्रिम उत्खनन गतिविधि में लिया भाग

संग्रहालय में प्रदर्शनी का अवलोकन करने के उपरांत मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ई-कार्ट में सवार होकर महोत्सव के मेला स्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने कृत्रिम उत्खनन गतिविधि में भाग लेकर पुरातात्विक खोज और उत्खनन की प्रक्रिया को समझा। इस गतिविधि के माध्यम से प्राचीन सभ्यता के अवशेषों की खोज, उनके संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के महत्व को प्रदर्शित किया गया।

राखीगढ़ी जैसे ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं को अपनी प्राचीन विरासत से जोड़ना और पुरातत्व के प्रति रुचि विकसित करना है। कृत्रिम उत्खनन जैसी गतिविधियां लोगों को यह समझने में सहायता करती हैं कि पुरातत्वविद किस प्रकार सावधानीपूर्वक खुदाई कर ऐतिहासिक अवशेषों की पहचान करते हैं और उनसे अतीत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करते हैं।

विभिन्न विभागों और उद्यमियों के स्टालों का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने महोत्सव स्थल पर विभिन्न सरकारी विभागों और उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टालों का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्टालों पर उपस्थित अधिकारियों, उत्पाद निर्माताओं और संचालकों से संवाद किया तथा उनके उत्पादों, गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। स्टाल संचालकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राखीगढ़ी महोत्सव स्थानीय उत्पादों को लोकप्रिय बनाने, उनकी विशेषताओं को लोगों तक पहुंचाने और बिक्री बढ़ाने के लिए एक शानदार एवं उपयुक्त मंच है।

महोत्सव में विभिन्न प्रकार के उत्पादों और विभागीय गतिविधियों का प्रदर्शन स्थानीय उद्यमियों को अपने कार्य का प्रचार-प्रसार करने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय शिल्प, पारंपरिक उत्पादों और उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

खेल प्रतियोगिताओं का शुभारंभ कर खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह

मंच पर पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने महोत्सव के अंतर्गत आयोजित खेल प्रतियोगिताओं का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए खेल भावना, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के महत्व को रेखांकित किया। खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से महोत्सव में सांस्कृतिक विरासत के साथ खेल प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जा रहा है।

पारंपरिक पगड़ी पहनाकर किया स्वागत, हस्तनिर्मित बैलगाड़ी भेंट की

ग्राम पंचायत राखीगढ़ी की ओर से मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ स्वागत किया गया। ग्राम पंचायत ने मुख्यमंत्री को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया और हस्तनिर्मित बैलगाड़ी स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की। यह स्मृति चिह्न हरियाणा की ग्रामीण संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और कृषि विरासत का प्रतीक है।

राखीगढ़ी महोत्सव के माध्यम से प्राचीन सभ्यता के पुरातात्विक साक्ष्यों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, स्थानीय उत्पादों, उद्यमिता और खेल प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। महोत्सव की विभिन्न गतिविधियां राखीगढ़ी की ऐतिहासिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने और इसे प्रमुख पर्यटन एवं शोध केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों को नई दिशा प्रदान करती हैं।

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