नई दिल्ली:
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए परीक्षा, जीवन, कौशल, सपनों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का सहज, व्यावहारिक और प्रेरक शैली में उत्तर देते हुए परीक्षा को बोझ नहीं बल्कि जीवन निर्माण की प्रक्रिया बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की अपनी अलग शैली होती है और दूसरों की नकल करने के बजाय अपने अनुभव और आत्मविश्वास के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षकों और अभिभावकों के सुझावों को ध्यान से सुनने, समझने और अपने अध्ययन पैटर्न में सार्थक सुधार करने की सलाह दी।
अध्ययन में पिछड़ने या कक्षा की गति से तालमेल न बैठ पाने के प्रश्न पर प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षक से एक कदम आगे चलने का प्रयास करना चाहिए, जिससे जिज्ञासा, समझ और आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर बल देते हुए कहा कि ज्ञान, जीवन कौशल और व्यावसायिक कौशल—तीनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षा केवल अंकों का मूल्यांकन नहीं है, बल्कि आत्ममूल्यांकन का अवसर है। केवल संभावित प्रश्नों या पुराने प्रश्नपत्रों पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को समझकर पढ़ने पर जोर दिया।
विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में प्रधानमंत्री ने समय प्रबंधन, एकाग्रता, आत्मविश्वास, तनाव प्रबंधन और रुचि आधारित सीखने के व्यावहारिक उपाय साझा किए। उन्होंने कहा कि डर तब दूर होता है जब विद्यार्थी पूरी तरह विषय में शामिल होते हैं और ज्ञान को साझा करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए गीत, कविता और कला के माध्यम से अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया। उन्होंने माता-पिता से भी आग्रह किया कि वे बच्चों की रुचि, क्षमता और सपनों को समझें और उन्हें खुलकर आगे बढ़ने दें।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी की 100वीं वर्षगांठ तक देश को विकसित बनाने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी के युवाओं पर है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों के संकल्प और बलिदान से देश आज़ाद हुआ, उसी प्रकार सामूहिक प्रयास, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से विकसित भारत का सपना साकार होगा।
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें, लेकिन उन्हें साकार करने के लिए छोटे-छोटे ठोस कदम रोज़ाना उठाएँ। उन्होंने कहा कि विकसित भारत कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि युवाओं की मेहनत, अनुशासन और संकल्प से बनने वाली वास्तविकता है।
