प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने “परीक्षा पे चर्चा 2026” कार्यक्रम के एपिसोड-2 में देश के विभिन्न हिस्सों के विद्यार्थियों से प्रत्यक्ष संवाद किया। इस विशेष संस्करण में प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, गुजरात के आदिवासी क्षेत्र, असम तथा उत्तर-पूर्वी भारत के विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं, सपनों और चुनौतियों को सुना।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “परीक्षा पे चर्चा” कोई सिखाने का नहीं, बल्कि सीखने का मंच है, जहां वे स्वयं युवाओं से बहुत कुछ सीखते हैं। इस संस्करण में विद्यार्थियों की ऊर्जा, जिज्ञासा और स्पष्ट सोच ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।
स्टार्टअप, एआई और करियर पर मार्गदर्शन
विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप शुरू करने के लिए उम्र बाधा नहीं है, बल्कि रुचि, टीमवर्क और समस्या-समाधान की सोच आवश्यक है। एआई पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक से डरने के बजाय उसे समझना और अपने कार्य में मूल्यवर्धन के लिए उपयोग करना चाहिए, न कि उसका गुलाम बनना चाहिए।
पढ़ाई, पैशन और अनुशासन का संतुलन
प्रधानमंत्री ने पढ़ाई और पैशन के बीच संतुलन पर बल देते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। उन्होंने अनुशासन को जीवन की अनिवार्य शक्ति बताते हुए कहा कि प्रेरणा तभी सार्थक होती है जब वह अनुशासन से जुड़ी हो।
विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों की ‘विकसित भारत 2047’ को लेकर सोच की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छता, नागरिक अनुशासन, वोकल फॉर लोकल, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार उपभोग जैसे छोटे-छोटे कदम देश को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
परीक्षा तनाव, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य
परीक्षा के तनाव पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने नियमित अभ्यास, पर्याप्त नींद, आत्मविश्वास और स्वयं से प्रतिस्पर्धा को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा को उत्सव की तरह लेना चाहिए और तुलना से बचकर आत्ममंथन करना चाहिए।
खेल, कला, संस्कृति और आदिवासी योगदान
कार्यक्रम के विभिन्न पड़ावों पर प्रधानमंत्री ने खेल और शिक्षा के संतुलन, स्थानीय कला-संस्कृति, आदिवासी समुदाय के योगदान और पर्यावरण संरक्षण पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने प्रकृति की रक्षा और राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
नेतृत्व और जीवन मूल्य
नेतृत्व पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सच्चा नेता वही होता है जो पहल करे, दूसरों को समझे और अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करे। आत्मविश्वास को ‘आत्मा और विश्वास’ का संगम बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को स्वयं पर विश्वास रखने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रधानमंत्री ने कहा कि “परीक्षा पे चर्चा” केवल परीक्षा की तैयारी नहीं, बल्कि जीवन के विविध पहलुओं को समझने और एक-दूसरे से सीखने का मंच है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
