(क): सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना (डब्ल्यूएलजीएसपी) के अंतर्गत मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले को पायलट जिले के रूप में चुना गया था । पायलट परियोजना के अंतर्गत बालाघाट जिले की बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी सोसायटी मर्यादित परसवाड़ा में 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले एक गोदाम का निर्माण किया गया । यह परियोजना पूरी तरह से पूर्ण हो चुकी है और इसका उद्घाटन दिनांक 24 फरवरी 2024 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था । इस गोदाम को मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (एमपीडब्ल्यूएलसी) द्वारा किराए पर लिया गया है । (ख): इस योजना को भारत सरकार (जीओआई) की विभिन्न मौजूदा स्कीमों, जैसे कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ), कृषि विपणन अवसंरचना योजना (एएमआई), कृषि यांत्रिकीकरण पर उप मिशन (एसएमएएम), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) आदि के अभिसरण के माध्यम से पैक्स/अन्य सहकारी समितियों के स्तर पर कार्यान्वित किया जा रहा है । अवसंरचना निधि (एआईएफ) योजना के अंतर्गत गोदामों के निर्माण हेतु लिए गए ऋण पर पैक्स को ब्याज अनुदान का लाभ दिया जाता है और कृषि विपणन अवसंरचना योजना (एएमआई) योजना के अंतर्गत खाद्यान्न भंडारण के निर्माण के लिए सब्सिडी दी जाती है । कृषि और किसान कल्याण विभाग ने कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) योजना के अंतर्गत पैक्स के लिए ऋण चुकौती अवधि को 2+5 से बढ़ाकर 2+8 वर्ष कर दिया है और कृषि विपणन अवसंरचना योजना (एएमआई) योजना के अंतर्गत निम्नलिखित संशोधन भी किए हैं: मार्जिन मनी की आवश्यकता को 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है । • मैदानी इलाकों के लिए निर्माण लागत को ₹3000–3500 प्रति मीट्रिक टन से संशोधित कर ₹7000 प्रति मीट्रिक टन और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ₹4000 प्रति मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹8000 प्रति मीट्रिक टन कर दिया गया है। • पैक्स के लिए सब्सिडी को 25% से बढ़ाकर 33.33% कर दिया गया है (मैदानी इलाकों के लिए ₹875 प्रति मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹2333 प्रति मीट्रिक टन और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ₹1333.33 प्रति मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹2666 प्रति मीट्रिक टन कर दिया गया है)। • पैक्स के लिए, भीतरी सड़कों, धर्मकांटा, चारदीवारी आदि जैसी सहायक अवसंरचनाओं के लिए कुल स्वीकार्य सब्सिडी के 1/3 (एक-तिहाई) की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। • यह एकीकरण किसानों को अपनी उपज का स्थानीय स्तर पर भंडारण करने, गिरवी ऋण प्राप्त करने और उचित समय पर बेचने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे किसानों—विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों—को संकटपूर्ण बिक्री से बचाया जा सके । (ग): गाँव/पैक्स स्तर पर विकेंद्रीकृत भंडारण से कृषि क्षेत्र के पास ही वैज्ञानिक भंडारण की सुविधा मिलने और हैंडलिंग को कम करके,फसलोत्तर नुकसान को काफी कम करने की उम्मीद है । स्थानीयकृत भंडारण दूर स्थित गोदामों या मंडियों तक बार-बार अनाज ले जाने की लंबी दूरी को कम करता है, जिससे परिवहन की दूरी और उससे जुड़ी लागतों में भी कमी आती है । सामूहिक रूप से, ये उपाय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्ति में सुधार करते हैं, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता बढ़ाते हैं और खाद्य सुरक्षा के परिणामों को सशक्त करते हैं। यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
